मानसिक स्वास्थ्य क्या है? हमारी सेहत इससे कैसे प्रभावित हो जाती है

what is mental health

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मानसिक स्वास्थ्य क्या है (what is mental health?) : मानसिक स्वास्थ्य या मेंटल हेल्थ हमारे भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण की भावना से बना हुआ है।

हमारे सोचने, महसूस करने, समझने और कार्य करने की कार्य क्षमता इससे प्रभावित होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर ही व्यक्ति को अपनी क्षमता का एहसास होता है।

और उसे अंदर से आप भरोसा होता है कि वह जीवन के सामान्य तनाव का सामना कर सकता है। और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में सक्षम है।

इंदौर स्थित समर्थ साइको हैप्पी थेरेपी एंड काउंसलिंग सेंटर के मनोचिकित्सक डॉक्टर संजय त्रिपाठी के अनुसार अगर हम चाहे तो मानसिक स्वास्थ्य को दो हिस्से में बाँट कर देख सकते हैं – 

  •  पहला – न्यूरोटिक समस्या 
  • दूसरा – साइकोटिक समस्या 

न्यूरोटिक समस्या में डिप्रेशन, चिंता, घबराहट, किसी चीज से फोबिया आदि शामिल होता है। वही साइकोटिक समस्याओं में शिजोफ्रेनिया, पैरानॉइा डिसऑर्डर जैसी बातें शामिल की जाती है।

सिजोफ्रेनिया क्या होता है ? :

सिजोफ्रेनिया एक मानसिक विकार है। जिससे व्यक्ति की सोचने और व्यवहार की क्षमता प्रभावित होती है। यह किसी भी व्यक्ति के स्पष्ट रूप से सोचने, कोई भी चीज महसूस करने और व्यवहार को प्रभावित कर देता है।

इसमें व्यक्ति कल्पना और वास्तविकता में अंतर नही कर पाता है। इसके अलावा इसके अन्य दूसरे लक्षणों मे सोचने, बोलने में असामान्य व्यवहार करना, व्यवहार में असामान्यता, रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि न होना।

जैसे कि सामाजिक लगाव, जीवन से संबंधित योजना बनाने में परेशानी महसूस करना आदि, इसके अंतर्गत आता है।

पैरानॉयड डिसऑर्डर क्या होता है ? –

पैरानॉइड डिसऑर्डर आमतौर पर सामान्य मानवीय प्रवृत्ति होती है। लेकिन जब यह किसी की आदत बन जाए और हमेशा यह बनी रहे तब यह पैरानॉइड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का संकेत कहा जाता है।

इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति में भ्रम में रहने की आदत हो जाती है। उसे छोटी-छोटी बातों पर बेवजह शक हो जाता है। जो समय के साथ पक्के विश्वास में बदल जाता है। इसे पैरानॉइड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है।

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मानसिक स्वास्थ्य हमारे सेहत को इस तरह प्रभावित करती है ( How mental health effect on our body) :- 

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या में डिप्रेशन की वजह से शारीरिक समस्याएं देखने को मिलती है। जब एक बार कोई व्यक्ति लंबे समय तक डिप्रेशन में रहता तो इससे दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्ट्रेस (तनाव) जीवन के लिए बेहद खतरनाक स्थिति होती है। डॉक्टर संजीव बताते हैं कि स्ट्रेस जानलेवा नही होता है। लेकिन स्ट्रेस की वजह से उत्पन्न हुए डिप्रेशन (अवसाद) जानलेवा हो सकता है। स्ट्रेस में आमतौर पर लोग सुसाइडल थॉट्स नही रखते हैं लेकिन अवसाद में यह चीजें देखने को मिलती है।

इस स्ट्रेस में आदमी आत्महत्या करने का विचार नही करता। लेकिन जब धीरे-धीरे यह बढ़ता जाता है तब यह डिप्रेशन की स्थिति में पहुंच जाता हैम फिर उस स्थिति में इंसान में सुसाइडल थॉट आने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या अन्य देशों के लोगों की तुलना में काफी अधिक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार साल 2020 तक भारत की आबादी का लगभग 20 फ़ीसदी आबादी मानसिक बीमारियों से पीड़ित रही है।

हालांकि इसके संबंध में कोई भी आंकड़ा अभी तक पेश नही किया गया है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान से यह कह सकते हैं कि देश में मानसिक समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

ऐसे में लोगों को इस बारे में जागरूक करना और उनमें जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि जागरूकता की कमी के कारण भी मानसिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति इसके बारे में जानकारी नही रख पाता है। ऐसे में अमानवीय व्यवहार का सामना उसको करना पड़ता है।

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