इंसानों के शरीर के सामान्य तापमान में क्यों कमी हो रही है ?
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इंसानों के शरीर के सामान्य तापमान में क्यों कमी हो रही है ?

एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग के चलते धरती गर्म हो रही है लेकिन अगर इंसान के शरीर की बात करें तो सामान्य तापमान इंसानों के शरीर का लगातार घटता जा रहा है अमेरिका और लंदन में इस संबंध में हुए ताजा शोध से पता चलता है कि इंसान के शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट के बजाय अब तेजी से बदल रहा है।

खासकर के ग्रामीण इलाकों में यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है। बोलिविया की एक गांव में 16 वर्ष तक कुछ लोगों पर इस विषय में अध्ययन किया गया।

साइंस एडवांस में प्रकाशित एक शोध में इस शोध को प्रकाशित किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत में भी इंसानों के शरीर का औसत तापमान घट रहा है और यदि ऐसा हो रहा है तो इसका क्या मतलब है?

मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान जर्मनी के डॉक्टर कार्ल रेन होल्ड अगस्त वंडरलिच ने 1851 में पहली बार क्लीनिकल थर्मामीटर का उपयोग करने के लिए एक मानक का निर्धारण किया था।

इसके लिए उन्होंने लाखों बार 25000 मरीजों के शरीर के तापमान को रिकॉर्ड किया था और उसके बाद उन्होंने 1968 में इस संबंध में एक किताब के रूप में अपना अध्ययन प्रकाशित किया था।

डॉक्टर कार्ल के अनुसार उस किताब में इंसान के शरीर का औसत तापमान 98.6 फॉरेनहाइट बताया गया था। आज तक वही माना जाता रहा है, लेकिन अभी हाल के कुछ वर्षों में हुए शोध से पता चलता है कि मनुष्य के शरीर का औसत सामान्य ताप अलग अलग होता है। यह औसत सामान्य ताप 97.7 डिग्री फॉरेनहाइट, 97.9 डिग्री फॉरेनहाइट, 98.2 डिग्री फॉरेनहाइट है।

इसी तरह से पिछले साल भी एक शोध प्रकाशित किया गया था जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नागरिकों के शरीर में के तापमान में पिछले दो दशकों से गिरावट देखी जा रही है।

अब तक के शोध ओ खुलासे में इंसान के शरीर के गिरते तापमान के संबंध में अभी तक कोई भी वजह नहीं बताई गई थी, न ही यह पता चल पाया था कि कम आय वाले देशों के शरीर में आवश्यक तापमान में क्या कोई बदलाव हो रहा है या नही?

लेकिन नए अध्ययन में इन सारी बातों का जवाब मिला है।  एक नया अध्ययन बोलविया के अमेजन के क्षेत्र में गरीब और पिछड़े इलाकों की जनजातियों के 5500 लोगों का 1800 बार तापमान रिकॉर्ड करके विश्लेषण किया गया है, जिसमें पता लगा है कि उष्णकटिबंधीय वातावरण में रहने की वजह से इन लोगों में ठंड और निमोनिया की समस्या देखी जा रही है, लेकिन गर्मी और टीबी जैसे संक्रमण नही पाए जा रहे हैं।

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वही ज्यादा संक्रमण के बीच रहने से बीमारियों का खतरा रहता है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए शोधकर्ताओं को इस बात की उम्मीद थी कि यहां के लोगों के शरीर का तापमान अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी के मुकाबले ज्यादा हो सकता है।

लेकिन इस अध्ययन में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस शोध में पता चला है कि सिमाने जनजाति के लोगों का शरीर का तापमान 0.09 डिग्री फॉरेनहाइट की दर से हर साल कम हो रहा है।

उनके शरीर का औसत तापमान 97.7 डिग्री फॉरेनहाइट पाया गया है। शोध से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में इनमें गिरावट दर्ज हुई है। इतनी गिरावट पिछली दो शताब्दियों में अमेरिकी नागरिकों के शरीर के तापमान में नही देखी गई है

औसत तापमान में गिरावट की ये है वजह :-

शोधकर्ताओं के अनुसार शरीर के औसत तापमान में गिरावट निम्नलिखित वजह से हो सकती है। अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी अवधारणा है कि उच्च आय वाले लोगों के लिए स्वच्छता का स्तर और स्वास्थ्य सुविधाएं अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा बेहतर उपलब्ध होती है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

 

body temp

जिसका नतीजा यह है कि उनके शरीर का तापमान घट रहा है। वही सिमाने लोगों की बात अगर की जाए तो उच्च आय वर्ग वाले लोगों की तुलना में इनके पास सुविधाओं की कमी होती है। लेकिन इसके बावजूद दो दशकों में इनके जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है।

यही वजह है कि इनके शरीर का तापमान घट रहा है। संक्रमण में कमी पहले की तुलना में आईब्रूफेन जैसी संक्रमणरोधी दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं, जिसकी वजह से शरीर का तापमान घटने लगा है।

 शारीरिक श्रम में कमी :-

ऐसा कहा जाता है कि पहले की तुलना में अब लोगों का स्वास्थ्य ज्यादा बेहतर हो रहा है। ऐसे में किसी संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर को कम मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा कठोर शारीरिक परिश्रम में भी अब कमी आ गई है। ठंड से मुकाबला करने के लिए कपड़े कंबल आदि की उपलब्धता पहले की तुलना में बढ़ गई है। यह भी एक वजह हो सकती है जिसकी वजह से शरीर के औसत तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।

 भारत की स्थिति :-

नोएडा के सेक्टर 12 के क्लीनिक चलाने वाले एक डॉक्टर का कहना है कि उनके पास जो भी मरीज इन दिनों आ रहे हैं उनके सामान्य ताप में अंतर देखा जा रहा है। मौसम और रहन-सहन के हिसाब से लोगों के शरीर के औसत तापमान अलग-अलग रहते हैं।

इसके अलावा अलग-अलग देशों के लोगों का सामान्य तापमान भी अलग अलग होता है, जिसके लिये जलवायु, साफ-सफाई, लाइफस्टाइल जैसे कारक जिम्मेदार हैं।

यह शोध इस बात की तरफ संकेत करता है कि शरीर का सामान्य तापमान घटने की कई वजह हो सकते हैं और यह सभी कारण जीवन स्तर में सुधार की वजह से देखे जा रहे हैं।

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