जीवन जीने की कला है योग

ऋषि मुनियों की धरोहर है योग। योग का अर्थ है जुड़ना। विष्णु पुराण के अनुसार “योगः संयोग इत्युक्त: जीवात्मा परमात्मने”। जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णता मिलन ही योग है। अष्टांग योग, योग की सबसे प्रचलित धारा है यम, नियम, आसन प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। शिव ही युग के प्रवक्ता कहलाए जाते हैं। योग तनाव … Continue reading जीवन जीने की कला है योग